उत्तराखंड आंदोलनकारी, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, सूबेदार मेजर (रिटायर्ड) स्व. टीकाराम पाण्डेय ‘एकाकी’ जी की १२वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ग्लोरियस अकैडमी विद्यालय बनबसा में वृहद काव्य गोष्ठी तथा मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें चकरपुर, बनबसा, खटीमा आदि जगहों से दो दर्जन के करीब कवि तथा शायर उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का प्रारंभ पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ तथा त्रिलोचन जोशी जी ने सरस्वती वंदना “अर्चना स्वीकार कर मां शारदे” प्रस्तुत की।
डॉ० आर. सी. रस्तोगी जी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० महेंद्र प्रताप पांडेय ‘नन्द’ जी द्वारा की गई।विशिष्ट अतिथि – श्री कैलाश पांडेय जी। कार्यक्रम का संचालन राम रतन यादव जी द्वारा किया गया।
सर्वप्रथम विद्यालय प्रबंधक रविंद्र पांडेय जी ने अपने पूज्य पिताजी श्री टीकाराम पाण्डेय ‘एकाकी’ जी द्वारा लिखी गयी कुछ कविताओं का पाठ किया एवं उनकी बहुमुखी प्रतिभा का एक चित्र सभी के समक्ष प्रस्तुत किया।
तत्पश्चात सभी कवियों तथा शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की जो इस प्रकार हैं –
प्रेमी का कथन सच्चा समझो
मेरी कलम है लिखती झूठ नहीं ।
– रामचंद्र प्रेमी ‘दद्दा’, खटीमा
मचा रहे बवाल हैं, अजीब चाल-ढाल हैं
-त्रिलोचन जोशी ‘ टी सी गुरु’, खटीमा
भीड़, शोर-शराबे में आप अपनी
अंतर्ध्वनि कहाँ सुन पाओगे।
– डॉ नीलम पाण्डेय ‘नीलिमा’, खटीमा
बहुत भयानक है तेरी चुप्पी,
चुप्पी ने विष घोले हैं।
– शांति देवी ‘शांति’, चकरपुर
पापा जी जब आयेंगे
बादल को ले आयेंगे
-नूरेनिशाँ
ढल रही है शाम, याद आ रहे हो तुम
– हेमा जोशी ‘ परू’, खटीमा
पिताजी क्या लिखूँ आपके बारे में
आप मेरे जीवन का आधार हो।
-मदन मौनी
खूबसूरत हूँ मैं ऐसा मान रखा है
भ्रम ये देखो कैसा पाल रखा है।
– दीपक फुलेरा ‘ बेबाक ‘, चकरपुर
मेरा बौना अहम
सिमटकर किसी कोने में मुंह छुपाता है।
-हेमा पाठक
मां तू जग की जननी है, तू ही जीवन का है आधार
-प्रकाश गोस्वामी ‘ आक्रोश, बनबसा
करके नशा ना जाने उसने क्या पाया
कुछ देर की बेहोशी वो खरीदकर लाया
– रविन्द्र पाण्डेय ‘ पपीहा’, बनबसा
तेरे मुंह पर तेरे जैसी, मेरे मुँह पर मेरे जैसी
– डॉ. जगदीश पंत ‘ कुमुद ‘, चकरपुर
स्पर्श तुम्हारी सांसों का हो
निशब्द सा फिर आलिंगन हो।
– बसंती सामंत, खटीमा
कान्हा तो मीत सभी का है,
मैं केवल मीत तुम्हारा हूँ।
– रावेंद्र कुमार ‘रवि’, खटीमा
पैर चादर में न आएं, तो बताओ क्या करूँ?
दफ़्न कर हर स्वप्न को, नित अश्रु मोती क्यों झरूँ?
– नक्षत्र पाण्डेय, बनबसा
पुष्पित हरित पल्लवित पादप
भुला न देना उस माली को
-राम रतन यादव, खटीमा
जबसे हाथ मोबाइल आया,
सबके ऊपर चढ़ी जवानी
-डॉ० महेंद्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’
श्याम वीर सिंह, खटीमा द्वारा गीता तथा महाभारत पर उद्गार व्यक्त किए गए। उन्होंने बताया की वाल्मीकि रामायण में पिता को देवताओं का भी देवता कहा गया है।
पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ कवियों को आयोजक रविन्द्र पाण्डेय ने पौधे देकर सम्मानित किया तथा सभी का आभार व्यक्त किया।
अंत में डॉ० आर. सी. रस्तोगी जी ने समस्त कार्यक्रम की समीक्षा की, सभी कवियों का उत्साह वर्धन किया एवं विद्यालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों को सराहा।

