*प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ग्रीष्मकाल में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक निर्बाध और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय और जनसहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जल संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण की दिशा में ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश जल संकट की किसी भी स्थिति से सुरक्षित रह सके*

चंपावत 11 अप्रैल, 2025, सूवि।

*प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ग्रीष्मकाल में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक निर्बाध और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय और जनसहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जल संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण की दिशा में ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाले समय में प्रदेश जल संकट की किसी भी स्थिति से सुरक्षित रह सके*।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने यह बात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सभी जिलाधिकारी और जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान कही।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रीष्मकाल के दौरान प्रदेश भर में पेयजल की समुचित और सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी उपायों को प्राथमिकता पर क्रियान्वित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कहा कि प्रदेशभर में पेयजल की उपलब्धता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संकट की किसी भी संभावना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष अत्याधिक संभावित गर्मी के तहत पेयजल, विद्युत, वनाग्नि ओर स्वास्थ जैसी समस्याएं उत्पन्न होंगी, जिसके लिए अभी से ठोस नीति बना कर कार्य करे ताकि किसी भी अप्रिय घटनाओं को होने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि पेयजल समस्याओं के समाधान हेतु अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियाँ समान रूप से आवश्यक हैं। इसके लिए उन्होंने जल संरक्षण के प्रभावी उपायों जैसे गाड़, गधेरो, नौले, धारों को रिचार्ज करने हेतु समन्वय से कार्य करें। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग हेतु कैचमेंट एरिया में डैमो और चेक डैमो को बनाने हेतु स्थानों का चिन्हीकरण करें और पौधारोपण हेतु अभी से योजनाएं तैयार करें। साथ ही, उन्होंने जल के अनियंत्रित दोहन, होटल रिसोर्ट पर पेयजल बर्बादी नहीं किए जाने हेतु पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए, जिससे जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके।

पेयजल समस्याओं से निपटने हेतु 24*7 कंट्रोल रूम स्थापित करें तथा कंट्रोल रूम में आने वाली सभी पेयजल समस्याओं का त्वरित निस्तारण करें।

इसके अतिरिक्त उन्होंने ने कहा कि जिन स्थानों में पेयजल लीकेज की समस्या है वहां युद्ध स्तर पर पेयजल लीकेजो को तत्काल ठीक करें ताकि पानी व्यर्थ सड़कों व नालियों में ना बहे।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर स्वयं स्थिति का आकलन करें और स्थल पर ही पेयजल संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि पेयजल बर्बादी की निगरानी किए जाने हेतु पेयजल कमेटी गठित करें। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन में आने वाली पेयजल समस्याओं की शिकायतों का जिलाधिकारी अपने स्तर से शीघ्रता से निस्तारण करें।
उन्होंने कहा कि ऐसे गांव जहां पेयजल संकट है वहां टैंकर, घोड़ा, खच्चर आदि से व्यवस्था कर उन स्थानों के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार करें।

जनपद चंपावत की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी नवनीत पांडे ने अवगत कराया की जनपद में 17 स्थान पर लीकेज की समस्या थी जिसे उसी दिन ठीक कराया गया। इसके अतिरिक्त जनपद में 800 हैंडपंप है जो सभी चालू अवस्था में हैं। इसके अतिरिक्त खनन न्यास निधि से 30 अतिरिक्त नए हैंडपंप लगाए गए हैं। जनपद में 51 ट्यूबवेल है जो सभी चालू अवस्था में हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि गत वर्ष 54 पिकअप के माध्यम से लोगों तक पेयजल पहुंचाया गया इस वर्ष 70 पिकअप रखे गए हैं जो पेयजल संकट वाले स्थलों में जाकर पेयजल आपूर्ति करेंगे। इस हेतु रोस्टर भी तैयार किया गया है। इसके अलावा जिलाधिकारी ने बताया कि पूर्णागिरि मेला क्षेत्र में 37 स्टैंड पोस्ट है व तीन प्याऊ बनाए गए हैं। जिससे श्रद्धालुओं को पेयजल की समस्या ना हो।

इस समीक्षा बैठक में शासन से मुख्य सचिव आनंद वर्धन सहित अन्य उच्च स्तरीय अधिकारी व जनपद से मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता जल संस्थान बिलाल यूनुस, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम वीके पाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, अलकेश नौडियाल सहित अन्य उपस्थित रहे।