बनबसा : व्यक्ति यदि अपने जीवन काल में किसी कारण बस तीर्थ के दर्शन नहीं कर पाता है तो इससे निराश होने की कोई जरूरत नहीं है ऐसा व्यक्ति भागवत कथा का श्रवण कर ही अपने सारे मनोरथ और मोक्ष की प्राप्ति कर सकता हैl यह बात बमनपुरी ग्राम सभा के भूमिया मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत पुराण कथा दूसरे दिन व्यास गद्दी पर विराजमान कथा वाचक डा0 कैलाश चंद्र भट्ट ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहीl उन्होंने कहा कि तीर्थाटन के अलावा भगवत प्राप्ति और मोक्ष प्राप्त करने के कई अन्य मार्ग भी हमारे शास्त्रों में बताए गए हैं उनमें से कथा का श्रवण करना भी एक हैl उन्होंने उपस्थित श्रुति श्रद्धालुओं को कहा कि धुंधकारी नाम का एक महा पापी मृत्यु के उपरांत प्रेत योनि में चला गयाl प्रेत योनि में जाने के उपरांत उसने अपने भाई गोकर्ण से स्वप्न में आकर कहा कि मेरी किसी प्रकार मुक्ती करवा दो और मुझे प्रेत योनि में बहुत पीड़ा हो रही हैl इसके उपरांत गोकर्ण ने विद्वान ब्राह्मणों से संपर्क कर उसका गया जाकर श्राद्ध तर्पण और पिंडदान कियाl गोकर्ण को लगा कि गया में श्राद्ध करने से पापी इंसान को प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती हैl गया में श्राद्ध आदि करने के उपरांत महापापी धुंधकारी अपने भाई गोकर्ण के स्वप्न में आया और बोला कि भाई मुझे गया में श्राद्ध करने से भी मुक्ति नहीं मिली हैl इसके उपरांत अपने भाई धुंधकारी की व्यथा से परेशान होकर उसने पुनः विद्वान ब्राह्मणों से संपर्क किया और ब्राह्मणों ने उसे धुंधकारी की मुक्ति के लिए श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन करने को कहाl ब्राह्मणों से विचार विमर्श कर गोकर्ण ने श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया इस दौरान प्रेत योनि में धुंधकारी कथा स्थल पर एक 7 गांठ वाली बास में छुपकर श्रीमद् भागवत कथा सुनने लगाl कथा के सातवें दिन वह बस फटा और महा पापी धुंधकारी कथा l श्रीमद् भागवत कथा में मंदिर समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह नेगी, पंडित दया किशन पंत, विमला सजवान, नवीन जोशी, त्रिलोचन जोशी, दीपू रौतेला, अशोक जोशी, केतन भट्ट, दिनेश भट्ट आदि लोगों द्वारा श्रीमद् भागवत कथा में सहयोग किया जा रहा है l