चंपावत 27 जून 2025,
*सड़क से जुड़ी मांगों” पर जानने बनबसा के गाँवों में पहुँचा प्रशासनिक दल*
*बनबसा के ग्रामों में सड़क संबंधित मांगों को लेकर किया गया स्थलीय परीक्षण*
हाल ही में एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर “बनबसा के ग्रामीणों ने कहा – सड़क नहीं तो मतदान नहीं” के संबंध में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती के निर्देशन में जिला पंचायती राज अधिकारी श्री भूपेन्द्र कुमार के नेतृत्व में वस्तुस्थिति की जानकारी लेने हेतु ग्राम पंचायत विकास अधिकारी श्रीमती रीता बिष्ट द्वारा संबंधित ग्रामों का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
ग्राम फागपुर (अंबेडकर नगर) में नाले किनारे स्कूल से लाल सिंह के आवास तक लगभग 700 मीटर लंबे मार्ग के संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग अत्यंत संकरा हो गया है तथा नाले को पाटकर सड़क चौड़ी किए जाने की आवश्यकता है। निवर्तमान ग्राम प्रधान/प्रशासक श्री हर्ष बहादुर चंद द्वारा अवगत कराया गया कि मार्ग का सर्वेक्षण कर प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी मतदान के विरोध का कोई पत्र नहीं दिया है, बल्कि केवल सड़क निर्माण की मांग रखी है।
ग्राम पंचायत गुदमी व लाटाखल्ला संपर्क मार्ग के संबंध में बताया गया कि यह मार्ग वन विभाग की भूमि पर आता है। इस विषय में ब्लॉक अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सामंत द्वारा स्पष्ट रूप से “सड़क नहीं तो मतदान नहीं” कथन का खंडन किया गया है।
ग्राम आनंदपुर में लगभग 800 मीटर लंबी ग्रामीण सड़क भी वन विभाग के अधीन है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी द्वारा ग्रामीणों से संवाद के उपरांत बताया गया कि “सड़क नहीं तो मतदान नहीं” जैसी किसी बात को ग्रामीणों ने न तो कहा और न ही समर्थन किया है।
ग्राम बमनपुरी में पेट्रोल पंप के निकट से गाँव तक जाने वाला मार्ग अत्यंत संकरा हो गया है, जहाँ वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने ऐसे किसी भी कथन से इनकार करते हुए आगामी पंचायत चुनाव में पूर्ण सहभागिता की बात कही।
ग्राम मझगांव स्थित एसएसबी कैंप से सोनिया नाले तक संपर्क मार्ग, जो कि ग्राम पंचायत देवीपुरा के अंतर्गत आता है, लगभग 1500 मीटर लंबा है और वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी द्वारा बताया गया कि वन विभाग द्वारा इस मार्ग पर गड्ढों को भरने के लिए आईबीएम से भरान कराया गया है।
सभी संबंधित ग्रामों में ग्रामीणों से संवाद करने पर यह स्पष्ट हुआ कि समाचार पत्र में प्रकाशित “सड़क नहीं तो मतदान नहीं” जैसा कोई भी कथन तथ्यात्मक रूप से असत्य है तथा सभी ग्रामीणों ने इसका खंडन किया है।
इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती ने कहा: “पंचायती राज व्यवस्था का मूल आधार ही ‘जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता की सहभागिता से’ है। इसमें समस्याओं का समाधान शासन के साथ-साथ जनसहभागिता से ही संभव होता है। पंचायती राज प्रणाली में यह सवाल ही नहीं उठता कि लोग अपने विकास के लिए आगे आएं — यह तो स्वाभाविक और आवश्यक है कि जनता स्वयं विकास प्रक्रिया में सक्रिय भाग ले।

