गुदमी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप, सीएम पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत

गुदमी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप, सीएम पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत

चंपावत। विकासखंड चंपावत की ग्राम पंचायत गुदमी में वर्ष 2019 से 2025 तक कराए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने इस संबंध में सीएम पोर्टल पर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत के अनुसार जांच की जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी को दी गई थी, लेकिन उन्होंने निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायत की जानकारी पंचायत विकास अधिकारी (GPDO) रीता बिष्ट को दे दी। आरोप है कि इससे उन्हें सबूत मिटाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का अवसर मिल गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि रीता बिष्ट उन्हें फोन पर धमका रही हैं।

ग्राम प्रधान विनीता राणा और उनके प्रतिनिधि जसवंत बसेड़ा पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार ग्राम प्रधान ने अपने ही नाम पर भुगतान लिया, जो नियमों के विरुद्ध है। वहीं, उनके प्रतिनिधि और परिजनों को मजदूर दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है।

शिकायत में कहा गया है कि पंचायत अभिलेखों में 47 ऐसे लोगों को मजदूरी भुगतान दर्शाया गया, जिनका गुदमी ग्रामसभा से कोई संबंध नहीं है। इन बाहरी व्यक्तियों पर करीब 2.8 लाख रुपये खर्च दर्ज है। इससे न केवल नियमों की अवहेलना हुई, बल्कि स्थानीय मजदूरों के अधिकारों का भी हनन हुआ।

कई भुगतान वाउचर और गतिविधि कोड (Activity Code) पर सवाल उठे हैं। चौथे राज्य वित्त आयोग से जुड़े कार्यों में बिना प्रस्ताव और तकनीकी स्वीकृति के भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, आठ अलग-अलग सीसी मार्गों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन इनमें geo-tag और गतिविधि कोड तक नहीं है। पंचायत भवन और सार्वजनिक शौचालय की गुणवत्ता को भी मानकों के विपरीत बताया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ सप्लायर्स—A2Z Traders और Himalaya Traders—को लगातार बड़े भुगतान किए गए। कई बार अधूरे और बिना जीएसटी नंबर वाले बिल स्वीकार कर लिए गए। आरटीआई के तहत जब बिल मांगे गए तो पंचायत विकास अधिकारी ने यह कहकर मामला टाल दिया कि “सभी बिल बाढ़ में बह गए,” जबकि पोर्टल पर उपलब्ध बिल अधूरे और संदिग्ध पाए गए।

मनरेगा कार्यों में भी गड़बड़ी का आरोप है। मछली तालाब निर्माण में स्वीकृत लागत और व्यय में भारी अंतर बताया गया। लारा खेत सीसी मार्ग पर 1.27 लाख रुपये केवल अकुशल मजदूरी में दर्शाए गए, जबकि सामग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। अन्य ग्रामसभाओं के लोगों के नाम पर गुदमी में जॉब कार्ड बनाए जाने की बात भी सामने आई है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बावजूद निष्पक्ष जांच की बजाय उन्हें डराने और चुप कराने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए। साथ ही, ग्राम प्रधान विनीता राणा, प्रतिनिधि जसवंत बसेड़ा और पंचायत विकास अधिकारी रीता बिष्ट को जांच प्रक्रिया से अलग रखा जाए।

ग्रामीणों ने सभी कार्यों का geo-tagging, स्थल निरीक्षण और वित्तीय ऑडिट कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।