चंपावत 13 जुलाई 2025,
*जय मां पूर्णागिरि स्वयं सहायता समूह की लक्ष्मी जोशी: आत्मनिर्भरता की मिसाल, बनीं लखपति दीदी*
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत जय मां पूर्णागिरि स्वयं सहायता समूह, डड़ाबिष्ट से जुड़ी श्रीमती लक्ष्मी जोशी ने अपनी कड़ी मेहनत और उद्यमशीलता से एक नई मिसाल कायम की है। लक्ष्मी जोशी, जिन्होंने समूह से मिली वित्तीय सहायता और अपने अथक प्रयासों से ‘लखपति दीदी’ का दर्जा हासिल किया है, वर्तमान में वह ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
लक्ष्मी जोशी ने आजीविका के क्षेत्र में सब्जी उत्पादन और दुग्ध उत्पादन को अपना मुख्य कार्यक्षेत्र बनाया। उनकी लगन और दूरदर्शिता का परिणाम यह है कि मात्र एक माह (जून से जुलाई) में उन्होंने सब्जियों से शानदार आय अर्जित की। इस अवधि में उन्होंने ₹35,000 की शिमला मिर्च, 3 क्विंटल टमाटर (₹6,000) और ₹5,000 का खीरा बेचकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की।
सब्जी उत्पादन के साथ-साथ, लक्ष्मी जोशी दुग्ध उत्पादन में भी सक्रिय हैं। उनके पास पशुधन से प्रतिदिन 12 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जिसे वे नियमित रूप से बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं।
लक्ष्मी जोशी की इस सफलता में समूह के रीवॉल्विंग फंड (RF) का उपयोग एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। समूह से मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय को गति देने और अपनी आजीविका को सशक्त बनाने में मदद की। यह दर्शाता है कि कैसे छोटे स्तर पर मिली वित्तीय सहायता बड़े बदलाव ला सकती है।
आज, लक्ष्मी जोशी सिर्फ एक सफल उद्यमी ही नहीं, बल्कि ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई हैं। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर भी अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन से बड़े सपने देख सकती हैं और उन्हें साकार कर सकती हैं। जय मां पूर्णागिरि स्वयं सहायता समूह और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ऐसे ही अनगिनत ‘लखपति दीदी’ बनाने के अपने लक्ष्य में निरंतर सफल हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।


