वाराही धाम में सांगी पूजन के साथ यहां बगवाल मेले की धार्मिक प्रक्रियाएं हुई शुरू। चार खाम , सात थोक के लोगों ने सामूहिक रूप से पूजा में किया प्रतिभाग।

वाराही धाम में सांगी पूजन के साथ यहां बगवाल मेले की धार्मिक प्रक्रियाएं हुई शुरू।

चार खाम , सात थोक के लोगों ने सामूहिक रूप से पूजा में किया प्रतिभाग।

देवीधुरा।
वाराही धाम में आज सांगी पूजन के साथ यहां माँ वज्र वाराही के धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गये हैं। यहां प्राचीन काल से उस समय से सांगी पूजन की परंपरा चली आ रही है जब मुगल शासन के दौरान मुगलों द्वारा मां वज्र वाराही की मूर्ति एवं उनका डोला मुगल छीन कर ले गए थे जिसे लमगड़िया खाम के बहादुर वीरों द्वारा यहां लाकर उस सांगी (डोला) कोटला के लमगड़िया खाम के प्रधान के यहां रखा गया। लगभग कई वर्षों तक यह डोला उसी स्थान में रखा गया था तथा मेले के दौरान ही यहां लाया जाता था। अब इस डोले को रखने की यहां स्थाई व्यवस्था की गई है।
आज आचार्य भुवन शास्त्री , आचार्य कीर्ति शास्त्री द्वारा पूर्ण विधि विधान के साथ पूजा अर्चना सम्पन्न कराई, जिसमें आचार्य गिरजाशंकर जोशी ,ललित मोहन शास्त्री, हेम चन्द्र जोशी आदि ने पूजा कराने में सहयोग किया जबकि लमगड़िया खाम के प्रमुख वीरेंद्र लमगड़िया के प्रतिनिधि खीम सिंह लमगड़िया, गहड़वाल खाम के त्रिलोक सिंह बिष्ट के प्रतिनिधि राम सिंह बिष्ट, माधो सिंह,नंदन सिंह, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, वालिग खाम के बद्री सिंह एवं दीवान सिंह, गुरना के महेश पुजारी, टकना के जगदीश चंद्र,हरीश चंद्र, फुलाराकोट के हीरा सिंह ने पूजा में भाग लिया, संस्कृत महाविद्यालय के भगवा वेश धारी छात्रों ने वेदों की ऋचाओं का सामूहिक रूप से गायन कर पूरे वातावरण को आध्यात्म एवं सनातन के रसधारा में डुबो दिया। सभी ने विश्व कल्याण के लिए माँ वाराही से संवेद रूप में प्रार्थना की।

फोटो – वाराही धाम में सांगी पूजन करते आचार्य एवं चार खाम सात थोकों के प्रतिनिधि।