*चंपावत के शिमल्टा में ‘जल उत्सव सप्ताह’ के तहत चमका पौराणिक क्रांतेश्वर नौला, पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने के लिए ‘भागीरथ ऐप’ और वैज्ञानिक तरीकों पर दिया जोर*

चंपावत 11 जून 2026,

*चंपावत के शिमल्टा में ‘जल उत्सव सप्ताह’ के तहत चमका पौराणिक क्रांतेश्वर नौला, पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने के लिए ‘भागीरथ ऐप’ और वैज्ञानिक तरीकों पर दिया जोर*

उत्तराखंड की पारंपरिक जल विरासतों को सहेजने के उद्देश्य से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARRA) द्वारा संचालित ‘जल संरक्षण अभियान-2026’ के अंतर्गत गुरुवार को विकास खंड चंपावत के शिमल्टा गांव में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

01 से 15 जून तक मनाए जा रहे ‘जल उत्सव सप्ताह’ के क्रम में आज सुबह ग्रामीणों और अधिकारियों ने मिलकर शिमल्टा गांव के ऐतिहासिक व पौराणिक जल स्रोत ‘क्रांतेश्वर नौले’ में एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान नौले और उसके आस-पास के पूरे परिसर की गहन साफ-सफाई की गई। अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को संदेश दिया गया कि शुद्ध पेयजल की निरंतर उपलब्धता के लिए इन पौराणिक धरोहरों को बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए जल स्रोतों के पास गंदगी न फैलाने, प्लास्टिक कचरे का सही निस्तारण करने और कूड़े को हमेशा कूड़ेदान में ही डालने की अपील की गई। साथ ही, भविष्य के लिए जल स्रोतों की सटीक डिजिटल मैपिंग करने के उद्देश्य से सभी ग्रामीणों से ‘भागीरथ ऐप’ को अपनाने का विशेष आवाहन किया गया।
स्वच्छता अभियान की सफलता के बाद शिमल्टा स्थित पंचायत घर में ग्रामीणों के साथ एक महत्वपूर्ण जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता शिमल्टा के ग्राम प्रधान श्री गिरीश चंद्र पालीवाल ने की।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए ‘सारा’ (SARRA) के सोशल कोऑर्डिनेटर श्री हरीश चंद्र भट्ट ने उपस्थित जनसमुदाय को जल संरक्षण की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सामने रखते हुए समझाया कि किस तरह वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर पारंपरिक नौलों व धारों को सूखने से बचाया जा सकता है और उनके गिरते जल स्तर (डिस्चार्ज) को दोबारा बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सभी से अपनी इस बहुमूल्य संपदा के संरक्षण के लिए सदैव सजग और सक्रिय रहने की अपील की।
इस मौके पर ग्रामीण स्तर पर जल चेतना जगाने के उद्देश्य से प्रशासनिक और तकनीकी टीम भी मुस्तैद रही। कार्यक्रम में विकास खंड चंपावत से ग्राम विकास अधिकारी श्री अर्जुन सिंह भंडारी, ‘सारा’ के जियो हाइड्रोलॉजिस्ट श्री सुमित राणा और तकनीकी विशेषज्ञ श्री जीवन रंसवाल ने भी अपने विचार साझा किए।

गोष्ठी में ग्राम स्तर पर गठित ‘धारा नौला संरक्षण समिति’ के सम्मानित सदस्य, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां तथा भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीणजन उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी इस प्राकृतिक और पौराणिक धरोहर को अक्षुण्ण बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।