संत रविदास ने समरस समाज का दिया संदेश, भाजपा का सामाजिक समरसता अभियान पहुंचा गांव गांव में।

संत रविदास ने समरस समाज का दिया संदेश, भाजपा का सामाजिक समरसता अभियान पहुंचा गांव गांव में।

श्रीराम मंदिर के संघर्ष के बाद भी हमारा यह वर्ग अपने नाम के साथ भगवान श्रीराम का नाम लेकर चला आया है।

भाजपा नेता सतीश चंद्र पांडे बोले संत रविदास के विचार आज भी समाज को समानता, सम्मान और एकता का मार्ग दिखा रहे हैं।

चंपावत। संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक समरसता अभियान के तहत चम्पावत में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतीश चंद्र पांडे ने संत रविदास के जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, कोई दुखी न रहे और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिले। उनके विचारों ने सामाजिक समरसता और आत्मसम्मान की ऐसी अलख जगाई, जिसने सदियों से उपेक्षित समाज को नई पहचान और सम्मान दिलाने का कार्य किया।
सतीश चंद्र पांडे ने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का मूल संदेश सभी को साथ लेकर चलने का है। भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम ने शबरी, निषादराज और समाज के हर वर्ग को समान सम्मान दिया। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सामाजिक न्याय और समरसता की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रही है, जबकि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान और समान अवसर देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रकृति भी कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। नदी का जल, वृक्षों के फल और प्रकृति के संसाधन सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं। इसी भावना को अपनाकर समाज को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संत रविदास का जीवन और उनके विचार आज भी समाज को समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता की दिशा में प्रेरित कर रहे हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे। श्री पांडेय ने कहा हम अपने इस वर्ग के रिणी है जो श्रीराम मंदिर के सताबदियो से चले आ रहे संघर्ष के पिछे श्रीराम का नाम लगाते आ रहे हैं। असल में सनातन धर्म के ध्वज वाहक तो यही लोग हैं जिन्होंने तमाम यातनाएं सहीं है। इनका मान और सम्मान ही हमारी सच्ची श्रीराम की भगती होगी।

फोटो – सतीश चंद्र पांडे।