संकल्प से सिद्धि: चम्पावत के प्रकाश राम ने पहाड़ी परिस्थितियों को दी मात, ‘मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ से बने स्वावलंबन की मिसाल

चम्पावत 03 सितम्बर 2026,

*संकल्प से सिद्धि: चम्पावत के प्रकाश राम ने पहाड़ी परिस्थितियों को दी मात, ‘मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ से बने स्वावलंबन की मिसाल*

*धामी सरकार की योजनाओं का धरातल पर प्रभाव: बाराकोट के प्रकाश राम ने खड़ा किया 10 तालाबों का क्लस्टर, मत्स्य पालन से पाई आर्थिक समृद्धि*

*पहाड़ में स्वरोजगार का उभरता मॉडल: स्थानीय जल और ज़मीन से बदली किस्मत, प्रकाश राम की सफलता से प्रेरित होकर सहकारी समिति से जुड़ रहे ग्रामीण*

उत्तराखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और जन-कल्याणकारी नीतियों के फलस्वरूप स्वरोजगार तथा आजीविका के नवीन आयाम स्थापित हो रहे हैं।

राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की समस्या पर भी प्रभावी अंकुश लग रहा है।

चम्पावत जिले के विकासखंड बाराकोट अंतर्गत ग्राम धटीगांव निवासी श्री प्रकाश राम का स्वावलंबन की ओर बढ़ता यह कदम प्रदेश में शासकीय योजनाओं की सफलता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।

पर्वतीय क्षेत्र की कठोर भौगोलिक परिस्थितियों एवं सीमित संसाधनों के बावजूद प्रकाश राम ने मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में संचालित ‘मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ का लाभ उठाकर लगभग तीन वर्ष पूर्व मत्स्य पालन के क्षेत्र में पदार्पण किया था।

अपनी अटूट लगन, परिश्रम और प्रशासनिक सहयोग के बल पर उन्होंने विषम परिस्थितियों को अवसर में बदलते हुए आज 10 तालाबों का एक विशाल एवं सुव्यवस्थित मत्स्य क्लस्टर स्थापित कर लिया है। वर्तमान में इन तालाबों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 6 क्विंटल मत्स्य उत्पादन प्राप्त हो रहा है, जिससे वे वार्षिक 2 से 2.50 लाख रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर पूर्णतः आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हैं।

राज्य सरकार के ‘सशक्त ग्राम, समृद्ध उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करते हुए श्री प्रकाश राम की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत आर्थिक उत्थान तक सीमित नहीं है।

वे ‘एड़ी देवता मत्स्य जीवी सहकारी समिति, इजड़ा’ के माध्यम से संगठित होकर क्षेत्रीय ग्रामीणों एवं युवाओं को भी इस व्यवसाय से जुड़ने हेतु निरंतर प्रेरित कर रहे हैं।

स्थानीय संसाधनों—पहाड़ की भूमि और पहाड़ के जल—का कुशल उपयोग कर निर्मित यह आजीविका मॉडल यह स्पष्ट सिद्ध करता है कि जब शासन की नीतियां और योजनाएं धरातल पर पारदर्शी रूप से क्रियान्वित होती हैं, तो दुर्गम पर्वतीय अंचलों में भी स्वरोजगार एवं स्वावलंबन के स्वप्न धरातल पर साकार होते हैं।